ट्यूमर शरीर में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि या गांठ है, जबकि कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसमें कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं।
ट्यूमर क्या होता है?
ट्यूमर शरीर में कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि से बनने वाली एक गांठ या ऊतकों का समूह होता है। जब कोशिकाएं सामान्य नियंत्रण के बिना बढ़ने लगती हैं या समय पर नष्ट नहीं होतीं, तो असामान्य ऊतक का निर्माण हो सकता है, जिसे ट्यूमर कहा जाता है।
ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के हो सकते हैं:
- सौम्य ट्यूमर: ये कैंसरयुक्त नहीं होते और आमतौर पर आसपास के ऊतकों या शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते।
- घातक ट्यूमर: ये कैंसरयुक्त होते हैं और आसपास के ऊतकों में प्रवेश करने तथा शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने की क्षमता रखते हैं।
इसलिए, शरीर में ट्यूमर या गांठ पाए जाने का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं है।
कैंसर क्या होता है?
कैंसर शरीर की कोशिकाओं का एक ऐसा रोग है जिसमें असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ ऊतकों को नष्ट करने लगती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं आसपास के स्वस्थ ऊतकों में प्रवेश कर सकती हैं और कुछ मामलों में रक्त या लसीका तंत्र के माध्यम से शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती हैं। इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस कहा जाता है।
कई प्रकार के कैंसर ठोस ट्यूमर बना सकते हैं, लेकिन हर कैंसर में ठोस ट्यूमर बनना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, ल्यूकेमिया रक्त बनाने वाले ऊतकों से शुरू होने वाला कैंसर है और आमतौर पर ठोस ट्यूमर नहीं बनाता।
कैंसर और ट्यूमर में अंतर क्या है?
कैंसर और ट्यूमर में अंतर को इस प्रकार समझा जा सकता है:
ध्यान रखना जरूरी है कि ट्यूमर एक असामान्य ऊतक वृद्धि को दर्शाता है, जबकि कैंसर एक घातक बीमारी है। हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता और हर कैंसर में ट्यूमर बनना जरूरी नहीं है।
सौम्य और घातक ट्यूमर में क्या अंतर है?
सौम्य ट्यूमर
सौम्य ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होते। आमतौर पर ये आसपास के ऊतकों में प्रवेश नहीं करते और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते। हालांकि, इनका आकार काफी बढ़ सकता है और यदि ये मस्तिष्क जैसे संवेदनशील स्थान पर हों या किसी महत्वपूर्ण अंग पर दबाव डालें, तो गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं।
इसलिए सौम्य ट्यूमर को हमेशा पूरी तरह हानिरहित मानना सही नहीं है। इसकी गंभीरता उसके आकार, स्थान और शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव पर निर्भर करती है।
घातक ट्यूमर
घातक ट्यूमर कैंसरयुक्त होते हैं। इनमें मौजूद असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ सकती हैं और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कुछ मामलों में ये कोशिकाएं रक्त या लसीका तंत्र के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचकर वहां नई गांठ या ट्यूमर बना सकती हैं।
क्या हर ट्यूमर कैंसर होता है?
नहीं, हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता।
ट्यूमर सौम्य भी हो सकता है और घातक भी। सौम्य ट्यूमर कैंसर नहीं होते, जबकि घातक ट्यूमर कैंसर होते हैं। इसलिए केवल शरीर में गांठ या ट्यूमर महसूस होने के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
यदि शरीर में कोई नई गांठ दिखाई दे, उसका आकार बढ़ रहा हो या उसमें अन्य असामान्य बदलाव नजर आ रहे हों, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
क्या हर कैंसर में ट्यूमर बनता है?
नहीं। कुछ कैंसर ठोस ट्यूमर बनाते हैं, लेकिन कुछ कैंसर ऐसा नहीं करते। उदाहरण के लिए, ल्यूकेमिया रक्त बनाने वाले ऊतकों का कैंसर है और आमतौर पर ठोस ट्यूमर नहीं बनाता।
इसी तरह कैंसर का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि वह शरीर की किस कोशिका या ऊतक से शुरू हुआ है। इसलिए कैंसर को केवल शरीर में गांठ बनने से जोड़कर देखना सही नहीं है।
ट्यूमर और कैंसर की पहचान कैसे होती है?
शरीर में गांठ या असामान्य वृद्धि मिलने पर डॉक्टर पहले व्यक्ति के लक्षणों और स्वास्थ्य इतिहास को समझते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच और अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।
इनमें शामिल हो सकते हैं:
- रक्त की जांच
- अल्ट्रासाउंड
- सीटी स्कैन
- एमआरआई
- अन्य चित्र संबंधी जांच
- बायोप्सी
बायोप्सी में संदिग्ध ऊतक का नमूना लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच की जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कोशिकाएं कैंसरयुक्त हैं या नहीं। कैंसर की पुष्टि होने पर कोशिकाओं की विशेषताओं के आधार पर बीमारी के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी मिल सकती है।
कैंसर और ट्यूमर में कौन ज्यादा खतरनाक है?
ट्यूमर की तुलना में कैंसर ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि कैंसर एक घातक (Malignant) स्थिति है, जबकि ट्यूमर गैर-कैंसरकारी (Benign) भी हो सकता है। हालांकि, किसी ट्यूमर की गंभीरता उसके प्रकार, आकार और शरीर में उसके स्थान पर निर्भर कर सकती है।
सौम्य ट्यूमर आमतौर पर आसपास के ऊतकों या शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते, जबकि घातक ट्यूमर कैंसरयुक्त होते हैं और आसपास के ऊतकों में प्रवेश करने तथा शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने की क्षमता रखते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य गांठ या ट्यूमर को केवल उसके आकार या बाहरी रूप के आधार पर सामान्य या खतरनाक मानने के बजाय डॉक्टर से उचित जांच करवाना महत्वपूर्ण है।
डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि शरीर में कोई नई गांठ दिखाई देती है या पहले से मौजूद गांठ में बदलाव हो रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। खासतौर पर निम्न स्थितियों में जांच करवाने में देरी नहीं करनी चाहिए:
- गांठ का आकार लगातार बढ़ना
- गांठ में दर्द या अन्य बदलाव होना
- बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होना
- लंबे समय तक कमजोरी या थकान रहना
- असामान्य रक्तस्राव होना
- लगातार बने रहने वाले अन्य असामान्य लक्षण
इनमें से किसी भी लक्षण का मतलब सीधे कैंसर होना नहीं है। कई लक्षणों के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
निष्कर्ष
ट्यूमर और कैंसर एक ही चीज नहीं हैं। हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता और हर कैंसर में ठोस ट्यूमर बनना जरूरी नहीं है। सौम्य ट्यूमर आमतौर पर शरीर में नहीं फैलते, जबकि घातक ट्यूमर कैंसर होते हैं और आसपास के ऊतकों या शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकते हैं। इसलिए शरीर में किसी भी असामान्य गांठ या लंबे समय से बने लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ से जांच करवाना महत्वपूर्ण है। सही निदान के बाद ही बीमारी की प्रकृति और उचित उपचार का निर्णय लिया जा सकता है।
यदि आपको शरीर में किसी गांठ या कैंसर से जुड़े लक्षणों को लेकर चिंता है, तो डॉ. पूजा बब्बर, गुड़गांव में सबसे अच्छे मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, से परामर्श लेकर अपनी स्थिति का उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन करवाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हर ट्यूमर कैंसर होता है?
नहीं। ट्यूमर सौम्य या घातक हो सकता है। सौम्य ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होता, जबकि घातक ट्यूमर कैंसर होता है।
कैंसर और ट्यूमर में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
ट्यूमर असामान्य ऊतक या कोशिकाओं की वृद्धि है, जो सौम्य या घातक हो सकती है। कैंसर में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और आसपास के ऊतकों में प्रवेश करने या शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने की क्षमता रख सकती हैं।
क्या सौम्य ट्यूमर भी खतरनाक हो सकता है?
कुछ सौम्य ट्यूमर अपने आकार या स्थान के कारण महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाल सकते हैं और गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए डॉक्टर द्वारा इसकी निगरानी या उपचार की सलाह दी जा सकती है।
क्या हर कैंसर में ट्यूमर बनता है?
नहीं। ल्यूकेमिया जैसे कुछ कैंसर सामान्यतः ठोस ट्यूमर नहीं बनाते।
कैंसर की पुष्टि कैसे होती है?
लक्षण और चित्र संबंधी जांच कैंसर की आशंका पैदा कर सकती हैं, लेकिन कई मामलों में निश्चित निदान के लिए बायोप्सी और ऊतक की रोग-विज्ञान जांच की आवश्यकता होती है।