कम उम्र की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर?

कम उम्र की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर?

ब्रेस्ट कैंसर को पहले हमेशा बड़ी उम्र की महिलाओं की बीमारी माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज 20 से 35 वर्ष की युवा महिलाएँ भी बड़ी संख्या में इस रोग से प्रभावित हो रही हैं। यह बदलाव न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि हमारी जीवनशैली, आदतें और स्वास्थ्य से जुड़े कई पहलू तेजी से बदल रहे हैं।

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, हार्मोनल असंतुलन, तनाव, खान-पान, आनुवंशिकता, पर्यावरणीय कारक और आधुनिक जीवनशैली। इस ब्लॉग में हम हर कारण को विस्तार में समझेंगे और जानेंगे कि महिलाएँ कैसे खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने के प्रमुख कारण 

1. हार्मोनल असंतुलन — युवा महिलाओं में सबसे बड़ा कारण

कम उम्र की महिलाओं में हार्मोनल बदलाव बहुत तीव्र होते हैं। पीरियड्स की शुरुआत से लेकर प्रजनन आयु तक, शरीर में कई तरह के हार्मोन बनते और बदलते रहते हैं।
जब इनमें असंतुलन होता है, विशेषकर एस्ट्रोजन बढ़ जाता है, तो यही बाद में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।

हार्मोनल असंतुलन के पीछे ये कारण भी हो सकते हैं:

  • लगातार अनियमित माहवारी

  • PCOS का बढ़ना

  • लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन

  • बहुत कम नींद

  • अधिक तनाव

  • अचानक वजन बढ़ना या घटना

आजकल PCOS युवतियों में इतनी तेजी से बढ़ा है कि यह ब्रेस्ट कैंसर का एक बड़ा कारण माना जाने लगा है।

2. आधुनिक जीवनशैली में बदलाव – शरीर पर गहरा असर

आज का जीवन काफी बदल चुका है। युवा महिलाएँ पढ़ाई, नौकरी, सोशल लाइफ और करियर को संतुलित करते हुए अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं।
इसका असर सीधे शरीर पर पड़ता है:

  • देर रात तक जागना

  • दिनभर स्क्रीन के सामने बैठना

  • शरीर की पर्याप्त गतिविधि न होना

  • फास्ट फूड, पैकेज्ड फूड और मीठे का अधिक सेवन

  • अधिक कैफीन

  • लगातार बैठकर काम

ये आदतें न सिर्फ वजन बढ़ाती हैं बल्कि शरीर में ऐसी परिस्थितियाँ पैदा करती हैं जो कोशिकाओं को कैंसर की ओर धकेल सकती हैं।

मोटापा, इंफ्लेमेशन और हार्मोनल बदलाव, ये तीनों ब्रेस्ट कैंसर के लिए बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर हैं, और आधुनिक जीवनशैली इन्हें तेजी से बढ़ाती है।

3. परिवार में कैंसर का इतिहास – आनुवंशिक कारण

यदि परिवार में किसी निकट संबंधी, माँ, बहन, दादी, नानी, को ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर हुआ है, तो इसका असर युवा महिलाओं पर भी पड़ सकता है।
कई मामलों में BRCA1 और BRCA2 जीन में बदलाव पाया जाता है, जो कम उम्र में भी कैंसर का कारण बन सकता है।

ऐसे परिवारों में लड़कियों को 20 वर्ष की उम्र के बाद से ही नियमित जांच करवाती रहनी चाहिए, क्योंकि आनुवंशिक कैंसर आमतौर पर जल्दी बढ़ता है।

4. लगातार तनाव और मानसिक दबाव — शरीर का संतुलन बिगाड़ देता है

आज की युवा पीढ़ी मानसिक तनाव से ज़्यादा प्रभावित होती है।
पढ़ाई, करियर, प्रतियोगिता, आर्थिक दबाव, रिश्तों का तनाव, सोशल मीडिया की तुलना—ये सब मिलकर दिमाग पर बहुत भार डालते हैं।

लंबे समय तक तनाव:

  • नींद खराब करता है

  • हार्मोनल संतुलन तोड़ देता है

  • प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कमजोर कर देता है

  • शरीर में सूजन बढ़ाता है

ये सभी चीजें कैंसर की शुरुआत को बढ़ावा देती हैं।

5. देर से शादी और देर से माँ बनना

पहले महिलाएँ कम उम्र में माँ बनती थीं, जिससे हार्मोनल सुरक्षा मिलती थी।
लेकिन आज ज्यादातर महिलाएँ:

  • करियर पर ध्यान देना

  • आर्थिक स्थिरता

  • व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ

इन कारणों से शादी और motherhood दोनों में देरी करती हैं।

देर से माँ बनने से शरीर में एस्ट्रोजन लंबे समय तक अधिक बना रहता है, और यह ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ाता है।
जो महिलाएँ स्तनपान नहीं करातीं, उनमें भी जोखिम कुछ अधिक हो सकता है।

6. पर्यावरण में मौजूद हानिकारक रसायन

यह एक बड़ा कारण है जिसे लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
आजकल हमारे आसपास इतनी अधिक रसायन और प्रदूषण मौजूद हैं कि उनसे बचना मुश्किल हो गया है।

उदाहरण:

  • प्लास्टिक के बर्तनों में खाना

  • कॉस्मेटिक और skin products में मौजूद रसायन

  • हेयर-डाई, नेल-पेंट

  • परफ्यूम और डियो

  • कीटनाशक वाली सब्ज़ियाँ

  • रासायनिक दवाओं वाला दूध

  • प्रदूषित हवा

इनमें मौजूद तत्व शरीर के हार्मोन को बिगाड़ते हैं और कोशिकाओं में बदलाव ला सकते हैं।

7. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अत्यधिक उपयोग

गैजेट्स आज जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।
लेकिन मोबाइल को लगातार शरीर के पास रखना, लैपटॉप को गोद में रखना और स्क्रीन के संपर्क में लंबे समय तक रहना शरीर पर असर डाल सकता है।

भले ही इस पर शोध जारी है, लेकिन कुछ अध्ययनों में देखा गया है कि निरंतर विकिरण (रेडिएशन) कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।

8. शराब, धूम्रपान और नशीली चीजें

आजकल नाइटलाइफ़, पार्टी कल्चर और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण कई युवा महिलाएँ:

  • शराब

  • सिगरेट

  • हुक्का

  • वेप जैसी चीज़ो का सेवन करती हैं।

ये सभी चीजें शरीर के डीएनए को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे कैंसर बनने की संभावना बढ़ जाती है।
धूम्रपान महिलाओं में हार्मोनल कैंसर के मामलों को कम उम्र में बढ़ा देता है।

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर से बचाव कैसे करें? 

1. हर महीने स्वयं स्तन जांच करें

Self Breast Examination बहुत आसान है और हर महिला को इसे सीखना चाहिए।
किसी भी प्रकार की:

  • गांठ

  • लगातार दर्द

  • त्वचा में खिंचाव

  • अचानक आकार बदलना

  • निप्पल से तरल निकलना

जैसी चीज़ें तुरंत जांच करवानी चाहिए।

2. जीवनशैली को संतुलित रखें

एक स्वस्थ जीवनशैली बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकती है।

  • रोज़ 30–40 मिनट चलना

  • योग, प्राणायाम और हल्का व्यायाम

  • ताज़ा और घर का भोजन

  • जंक फूड कम करना

  • मीठे का सेवन सीमित रखना

  • नींद पूरी लेना

  • तनाव कम रखना

ये आदतें शरीर को भीतर से मजबूत बनाती हैं और कैंसर के जोखिम को कम करती हैं।

3. नियमित मेडिकल जांच और स्क्रीनिंग

यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है या आपको PCOS, thyroid, या अनियमित माहवारी जैसी समस्या है, तो नियमित जांच ज़रूरी है।
Early detection जीवन बचा सकता है।

4. स्तनपान के महत्व को समझें

स्तनपान न सिर्फ बच्चे के लिए बल्कि माँ के लिए भी स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है।
यह ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को प्राकृतिक रूप से कम करता है।

निष्कर्ष

कम उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ना आज की जीवनशैली और बदलते स्वास्थ्य पैटर्न का परिणाम है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि जागरूकता, समय पर जांच, स्वस्थ दिनचर्या और मानसिक शांति से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

यदि आपको किसी भी प्रकार का बदलाव, गांठ, दर्द, निप्पल से तरल, या ब्रेस्ट के आकार में अंतर, महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें।

गुरुग्राम में ब्रेस्ट कैंसर की जाँच और उपचार के लिए Dr. Pooja Babbar, जिनके पास 15+ वर्षों का अनुभव है, एक भरोसेमंद और अनुभवी मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट मानी जाती हैं।
उनके मार्गदर्शन और सही उपचार से रोग की पहचान और इलाज दोनों समय पर संभव होता है।

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